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SWAMI VIVEKANAND SAID:



"TALK TO YOURSELF ATLEAST ONCE IN A DAY
OTHERWISE
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रविवार, 31 जुलाई 2011

आज भी रोये वन में -nazrul giti




আজো কাঁদে কাননে কোয়েলিয়া।
চম্পা কুঞ্জে আজি গুঞ্জে ভ্রমরা-কুহরিছে পাপিয়া।।
প্রেম-কুসুম শুকাইয়া গেল হায়!
প্রাণ-প্রদীপ মোর হের গো নিভিয়া যায়,
বিরহী এসে ফিরিয়া।।
তোমারি পথ চাহি হে প্রিয় নিশিদিন
মালার ফুল মোর ধুলায় হ’ল মলিন
জনম গেল ঝুরিয়া।।



হাস্বৗর-ত্রিতাল


आज  भी रोये वन में कोयलिया 
चंपा कुञ्ज में आज गुंजन करे भ्रमरा -कुहके पापिया 
प्रेम-कुञ्ज भी सूखा हाय!
प्राण -प्रदीप मेरे निहारो हाय!
कहीं बुझ न जाय विरही आओ लौट कर हाय!
तुम्हारा पथ निहारूं हे प्रिय निशिदिन 
माला का फूल हुआ धुल में मलिन 
जनम मेरा विफल हुआ 

राग-हमीर 
ताल-त्रिताल 

प्यार है मुझे-ravindra sangeet



ভালোবাসি, ভালোবাসি--
এই সুরে কাছে দূরে জলে স্থলে বাজায় বাঁশি॥
আকাশে কার বুকের মাঝে ব্যথা বাজে,
দিগন্তে কার কালো আঁখি আঁখির জলে যায় ভাসি॥
সেই সুরে সাগরকূলে বাঁধন খুলে
অতল রোদন উঠে দুলে।
সেই সুরে বাজে মনে অকারণে
ভুলে-যাওয়া গানের বাণী, ভোলা দিনের কাঁদন-হাসি॥





प्यार है मुझे 
दूर या पास जल-स्थल इन्हीं  स्वरों में  बजे  बंशी 

वो आकाश में किसके ह्रदय में व्यथा बजे 
दूर दिगंत में किसके काली आँखों से आंसूं बहे ||

उस सुर-सागर के किनारों का बंधन तोड़कर 
अतल  रूदन बाहर आया झूमकर 

उन सुरों में अकारण ही मेरे मन में बजे 
भूला हुआ संगीत के स्वर ,और भूले हुए क्रंदन -हँसी 

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

शाओनो राते जोदी-नजरुल गीति


shaono rate jodi, sarone ase more
bahire jhoro bohe, noyne bari jhore
shaono rate jodi
sarone ase more, bahire jhoro bohe
noyne bari jhore
shaono rate jodi
bhulio sriti momo, nishitho swapano somo
bhulio sriti momo, nishitho swapano somo
ancholer gantha mala phelio patho pore
bahire jhoro bohe noyne bari jhore
shaono rate jodi
jhuribe pubali bay, gohono duro bone
jhuribe pubali bay, gohono duro bone
rohibe chahi tumi ekala batayane
ghirihi kuhu keka gahibe niposakhe,
jomuna nadi pare shunibe ke jeno dake
birohi kuhu keka gahibe niposakhe,
jomuna nadi pare shunibe ke jeno dake


bijoli dipo shikha, khujibe tomay priya,
duhate dheko annkhi, jodi go jole bhre
bahire jhoro bohe, noyne bari jhore
shaono rate jodi, sarone ase more
bahire jhoro bohe, noyne bari jhore
shaono rate jodi


सावन के रात में गर  स्मरण तुम आये 
बाहर तूफान बहे नयनों से बारि झरे 

भूल जाना स्मृति मम
निशीथ स्वपन सम 
आँचल में गुंथा माला 
फेंक देना पथ पर 
बाहर तूफान बहे नयनों से बारि झरे 


झरेंगे पुर्वायु, गहन दूर वन   में 
अकेले देखते रह जाओगे तुम 
इस वातायन में 


विरही  कुहु केका गायेंगे नीप शाखाओं पर 
यमुना नदी के पार सुनोगे कोई पुकारे 


बिजली दीपशिखा ढूँढेंगे तुम्हे पिया 
दोनों हाथों को ढकलेना आँखों को ज़रा 
 गर आंसूं से  नयन भरे 
बाहर तूफान बहे नयनों से बारि झरे 







गुरुवार, 28 जुलाई 2011

रविन्द्र संगीत - दाडिये आछो



দাঁড়িয়ে আছ তুমি আমার গানের ও পারে–
আমার সুরগুলি পায় চরণ, আমি পাই নে তোমারে ।
বাতাস বহে মরি মরি, আর বেঁধে রেখো না তরী–
এসো এসো পার হয়ে মোর হৃদয়মাঝারে.......

তোমার সাথে  গানের  খেলা  দুরের  খেলা  যে ,
বেদনাতে  বাঁশি  বজায়  সকল  বেলা  যে .
কবে   নিয়ে  আমার  বাঁশি  বাজাবে  গো  আপনি  আশি ;
আনন্দময়  নিরব  রাতের  নিবিড় আঁধারে .
দাঁড়িয়ে আছ তুমি আমার গানের ও পারে–

আমার  সুরগুলি  পায়  চরণ , আমি  পাই  নে  তোমারে . 

দাঁড়িয়ে আছ তুমি আমার গানের ও পারে–
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx


मेरे संगीत के उस पार आप है खड़े 
मेरे सुरों को मिला है आपका चरण स्पर्श पर 
आप मुझको नहीं मिले 

तुम्हारे साथ गीतों से क्रीडा 
जो है दूर का खेल
वेदना से भरे मन से 
बंशी बजे सुबह-शाम रे 

कब मेरी बंशी को लेकर 
आपही छेड़ेंगे आकर 
वो नीरव रात के निबिड़ अँधेरा भी 
आनंदमय होगा रे 




बुधवार, 27 जुलाई 2011

आमार मुक्ति आलोय आलोय


আমার মুক্তি আলোয় আলোয় এই আকাশে,
আমার মুক্তি ধুলায় ধুলায় ঘাসে ঘাসে॥
দেহ মনের সুদূর পারে হারিয়ে ফেলি আপনারে,
গানের সুরে আমার মুক্তি উর্ধ্বে ভাসে॥
আমার মুক্তি সর্বজনের মনের মাঝে,
দুঃখ বিপদ তুচ্ছ করা কঠিন কাজে।
বিশ্বধাতার যজ্ঞশালা, আত্মহোমের বহ্নি জ্বালা
জীবন যেন দিই আহুতি মুক্তি আশে॥



आमार मुक्ति आलोय आलोय  एई आकाशे

आमार मुक्ति धूलाय  
धूलाय घासे घासे 


देह मोनेर सुदूर पारे  हारिये फेली आपोनारे 
गानेर सूरे आमार मुक्ति उर्ध्वे भासे 

आमार मुक्ति सर्ब्बोजोनेर मोनेर माझे 
दू:ख बिपद तुच्छ कोरा कोठीन काजे 

बिश्वधातार यज्ञशाला,आत्म होमर बह्निजाला 
जीबों जानो दी आहुति मुक्ति आशे 


उपरोक्त गाने का आशय को अक्षुण रखते हुए अनुवाद करने की कोशिश करती हूँ :

आलोक से भरा इस आकाश में ही मेरा मोक्ष है छिपा 
इन धुल कणों में ,इन तृणों में मेरा मुक्ति है छिपा 

देह मन के  सुदूर छोर है जहां 
मन मेरा खो जाता है वहां 
इन गीतों के सुरों के उर्ध्व में मेरी मुक्ति है छिपा 

मेरी मुक्ति सर्वजनो के ह्रदय में है छिपा 
दू:ख विपद को तुच्छ करता हुआ कठिन कामो में है बसा 

विश्व विधाता के यज्ञशाला में 
आत्मा होम के अग्निशाला में 
मै अपने जीवन की आहुति दे दूं 
मुझे मुक्ति मिल जाए  



video




मंगलवार, 19 जुलाई 2011

ऐतबार -आशा भूपेंद्र

भूपेंद्र 
आवाज़ दी है आज एक नज़र ने या है ये दिल को गुमां
दोहरा रही है सारी फिजायें भूली हुई दास्ताँ 
आशा 
लौट आई है फिर रूठी बहारें कितना हसीं है समां 
दुनिया से कह दो न हमको पुकारे कि हम खो गए है यहाँ 
भूपेंद्र
जीवन में कितनी वीरानियाँ थी छाई थी कैसी उदासी 
सुनकत किसी के कदमो कि आह्ट हलचल हुई है ज़रा सी 
सागर में जैसे लहरें उठी है टूटो है खामोशियाँ 
दोहरा रही है सारी फिजायें भूली हुई दास्ताँ 
आशा 
तूफां में खोई  कश्ती को आखिर मिल ही गया है किनारा 
हम छोड़ आये ख़्वाबों कि दुनिया दिल ने तेरे जब पुकारा 
कब से कड़ी थी बाहें पसारे  इस दिल कि तन्हाइयां 
दुनिया से कह दो न हमको पुकारे कि हम खो गए है यहाँ 
भूपेंद्र
अब याद आया कितना अधूरा अब तक था दिल का फ़साना 
आशा 
यूं पास आके दिल में समाके दामन न हमसे छुडाना 
जिन रास्तों पर तेरे कदम हो  मंजिल है मेरी वहाँ 
दुनिया से कह दो न हमको पुकारे कि हम खो गए है यहाँ 
लौट आई है फिर रूठी बहारें कितना हसीं है समां 
दुनिया से कह दो न हमको पुकारे कि हम खो गए है यहाँ  

सोमवार, 18 जुलाई 2011

शाम से आंख में......


 शाम से आंख में नमी सी है,
 आज फिर आपकी कमी सी है.

 दफन कर दो हमें तो साँस आये,
 देर से सांस कुछ थमी सी है ;

कौन पथरा गया है आँखों में ?
बर्फ पलकों में तो जमी सी है

 शाम से आंख में नमी सी है ,
 आज फिर आपकी कमी सी है
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शनिवार, 16 जुलाई 2011

जाने दो मुझे-गुलज़ार


जाने दो मुझे जाने दो
जाने दो मुझे जाने दो
रंजिशें या गिले, वफ़ा के सिले
जो गये जाने दो
जाने दो मुझे जाने दो
जाने दो मुझे जाने दो

थोड़ी ख़लिश होगी, थोड़ा सा ग़म होगा 
तन्हाई तो होगी, एह्सास कम होगा
गहरी ख़राशों की गहरी निशानियाँ हैं
चेहरे के नीचे कितनी सारी कहानियाँ हैं
माजी के सिलसिले, जा चुके जाने दो 
ना आ आ..

उम्मीद-ओ-शौक़ सारे लौटा रही हूँ मैं 
रुसवाई थोड़ी सी ले जा रही हूँ मैं
बासी दिलासों की शब तो गुज़ार आये
आँखों से गर्द सारी रोके उतार आये
आँखों के बुल्बुले बह गये, जाने दो 
ना आ आ..
video

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

दिल पडोसी है-गुलज़ार

रिश्ते बनते है बड़े धीरे से 
    बनने भी दे 
कच्चे लम्हें को ज़रा शाख़ पे 
    पकने दे दे 

एक चिंगारी का उड़ना था कि
    पर काट दिए 
ओ आंच आई तो ज़रा आग को 
    जलने दे दे 
कच्चे लम्हें को ज़रा शाख़ पे 
    पकने दे दे 

एक ही लम्हे पे इक साथ 
    गिरे थे दोनों 
ओ खुद संभल के या ज़रा मुझको 
    सँभालने दे दे 
कच्चे लम्हें को ज़रा शाख़ पे 
    पकने दे दे 

video

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

इश्किया ....गुलज़ार /रेखा भरद्वाज


बड़ी  धीरे  जली … रैना
धुआं  धुआं  नैना  आ ..
बड़ी  धीरे  जली … रैना
धुआं  धुआं  नैना  आ ..

रातों  से  हौले  हौले …
खोली  है  किनारे
अखियों  ने  तागा  तागा …
भोर  उतारी
खारी अखियों  से,
धुआं  जाए  न
बड़ी  धीरे  जली … रैना
धुआं  धुआं  नैना  आ ..



पलकों  पे  सपनों  की, अग्नि  उठाये
हमने  तो अखियों  के , आलने  जलाये 
 दर्द  ने  कभी  लोरियां  सुने  तो
दर्द  ने  कभी  नींद  से  जगाया  रे
बैरी  अखियों  से  न  जाए  धुआं  जाए  न 
बड़ी  धीरे  जली … रैना
धुआं  धुआं  नैना  आ ..

जलते  चरागों  में  अब  नींद  न  आये
फूंकों  से  हमने ..सभी तारे   बुझाये 
 जाने  क्या  खोली, रात की  पिटारी  से
खोला  तो  कोई , भोर  की  किनारी  रे
सूजी  अखियों  से , न  जाए  धुआं  जाए  न 
बड़ी  धीरे  जली … रैना
धुआं  धुआं  नैना  आ ..


सीखो न .......शुभा मुद्गल

सीखो न नैनों की भाषा पिया
कह रही है तुमसे ये खामोशियाँ 
सीखो न लैब तो न खोलूंगी मै 
समझो दिल की बोली 
सीखो न..........

सुनना सीखो  उन हवा को 
स न न सन स न न सन कहती है क्या 
पढना सीखो सलवटों को 
माथे पे ये बलखा के लिखती है क्या 
आहटों की है अपनी जुबा 
इनमे भी है इक दास्ताँ 
जाओ जाओ जाओ जाओ पिया 
सीखो न ........

ठहरे पानी जैसा लम्हा 
छेड़ो न इसे हिल जायेंगी गहराइयां 
ग़म की साँसों के शहर में 
देखो तो ज़रा बोलती है क्या परछाइयां 
कहने को अब बाक़ी है क्या 
आँखों ने सब कह तो दिया 
हाँ जाओ जाओ जाओ जाओ पिया 
सीखो न ..............

Seekho Na Naino ki bhasha piya
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