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SWAMI VIVEKANAND SAID:



"TALK TO YOURSELF ATLEAST ONCE IN A DAY
OTHERWISE
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रविवार, 14 अगस्त 2011

मेरे गोपन निर्जन ह्रदय में               মোর হৃদয়ের গোপন বিজন ঘরে
अकेले हो तुम नीरव शयन में-             একেলা রয়েছ নীরব শয়ন প'রে-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||            প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
रुद्ध द्वार के बाहर खडी  हूँ मैं              রুদ্ধ দ্বারের বাহিরে দাঁড়ায়ে আমি
कबतक काटेंगे ऐसे दिन प्रिये-           আর কতকাল এমনি কাটিবে স্বামী-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||              প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
रजनी-तारका गगन में है छाया,            রজনীর তারা উঠেছে গগন ছেয়ে,
मेरे वातायन पर मैंने सबकी दृष्टि है पाया     আছে সবে মোর বাতায়ন-পানে চেয়ে-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||             প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
मेरे जीवन को  संगीत से भर दो            জীবনে আমার সঙ্গীত দাও আনি,
वीणा-वाणी को तुम नीरव न रख दो      নীরব রেখো না তোমার বীণার বাণী-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||            প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
मिलायेंगे ये नयन तुम्हारे नयनो के साथ,মিলাবো নয়ন তব নয়নের সাথে,
दूँगी तुम्हारे हाथों में ये हाथ-             মিলাবো এ হাত তব দক্ষিণহাতে-
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||             প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।
हृदयपात्र होगा अमृत से पूर्ण ,       হৃদয়পাত্র সুধায় পূ্র্ণ হবে,
गहरे प्रकाश-ध्वनि से तिमिर थर्थरायेगा তিমির কাঁপিবে গভীর আলোর      
प्रियतम हे, जागो जागो जागो ||                                               রবে-
                                                              প্রিয়তম হে, জাগো জাগো জাগো ।।




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