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मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

ओ साथी रे दिन डूबे न -ओंकारा


o saathi re | Upload Music

ओ साथी रे दिन डूबे न 
आ चल दिन को रोके 
धुप के पीछे दौड़े  छाँव छूए ना 
ओ साथी रे

थका-थका सूरज जब नदी से होकर निकलेगा
हरी-हरी काई पे पाँव पडा तो फिसलेगा
तुम रोक के रखना मैं जाल गिराऊँ
तुम पीठ पे लेना मैं हाथ लगाऊँ
दिन डूबे ना
तेरी मेरी अट्टी-बट्टी
दांत से काटी कट्टी
रे जियो ना ओ पिहू रे
ओ पीहू रे ना जईओ न

कभी-कभी यूं करना मैं डांटू और तुम डरना
उबल पड़े आँखों से मीठे पानी का झरना
तेरे दोहरे बदन सिल जाऊँगी रे
जब  करवट लेना छिल जाऊँगी रे
ओ संग ले जाऊँगा
तेरी-मेरी अंगनी-मंगनी
अंग संग लागे संगनी
संग ले जाऊं ओ पिहू रे
ओ साथी रे दिन डूबे न





शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

क्या खोया क्या पाया जग में,...(Samvedna-Atal Bihari Vajpayee 2002)

[LyricsMasti] Lyrics of Kya Khoya Kya Paya (Samvedna-Atal Bihari Vajpayee 2002)

क्या खोया क्या पाया जग में,
मिलते और बिछड़ते मग में,
मुझे किसी से नहीं शिकायत,
यधपि छला गया पग-पग में,
एक दृष्टि बीती पर डालें,
यादों की पोटली टटोलें,
जन्म मरण का अविरत फेरा,
जीवन बंजारों का अविरत डेरा,
आज यहाँ कल वहाँ कूच है,
कौन जानता किधर सवेरा,
अंधियारा आकाश असीमित,
प्राणों के पखों को तौलें,
अपने ही मन से कुछ बोलें,

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