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शनिवार, 14 मई 2011

बात ...दिल की

बात ...दिल की: "


घुप्प रात का अँधेरा
परछाई का नहीं नामोनिशाँ
फिर ये साया कौन?
जो मेरा हमराही है बन रहा

तुझसे बिछड़कर मरने का
कोई इरादा तो नही
इश्क किया है तुझसे
पर इतना बेपनाह तो नही

एकटक सितारों को क्यों देखते हो
इन सितारों से मिलने का तमन्ना तो नहीं ?




"

2 टिप्‍पणियां:

  1. एकटक सितारों को क्यों देखते हो
    इन सितारों से मिलने का तमन्ना तो नहीं ?
    अनामिका जी - प्यार में सब कुछ जायज है -प्यारे भाव कुछ भी कह लो -सुन्दर रचना
    दिल कोई खिलौना तो नहीं मत तोडिये ...
    इन सितारों से मिलने की तमन्ना ...कर दीजिये अच्छा हो जाये

    आभार आप का
    शुक्ल भ्रमर ५

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