समर्थक

SWAMI VIVEKANAND SAID:



"TALK TO YOURSELF ATLEAST ONCE IN A DAY
OTHERWISE
YOU MAY MISS A MEETING WITH AN EXCELLENT PERSON IN THIS WORLD".........

गुरुवार, 21 अक्तूबर 2010

इस पार प्रिये तुम हो

मुझे उस पार…. नहीं जाना ………..क्योंकि इस पार …
मैं तुम्हारी संगिनी हूँ ……..उस पार निस्संग जीवन है
स्वागत के लिए ……………इस पार मैं सहधर्मिणी
कहलाती हूँ ……..मातृत्व सुख से परिपूर्ण हूँ………………..
माता – पिता है …..देवता स्वरुप …….पूजने के लिए
उस पार मै स्वाधीन हूँ ………पर स्वाधीनता का
रसास्वादन एकाकी है……….. गरल सामान……..
इस पार रिश्तों की  पराधीनता  मुझे ……………….
सहर्ष स्वीकार है…………इस पार प्रिये तुम हो

5 टिप्‍पणियां:

  1. " इस पार रिश्तों का स्वाधीनता मुझे ……………….
    सहर्ष स्वीकार है………… " ye smajh men naheen aaya . pls samjhayen...
    - vijay

    उत्तर देंहटाएं
  2. maafi chahtii hoon ise swaadhiinta ke bajay paraadhiinta padhe ...........blog visit karne ke liye dhanyavaad

    उत्तर देंहटाएं
  3. परंपरा में जीना ... अगर बंधन है, पराधीनता है तो पाश्च्चात्य स्भ्यता और संस्कृति से ली गई सौ स्वाधीनता/स्वतंत्रता से अच्छा है। भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है!
    पक्षियों का प्रवास-१

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस पार प्रिये तुम हो.... अच्छा लगा!

    उत्तर देंहटाएं

iframe>

Comments

विजेट आपके ब्लॉग पर

BidVertiser

www.hamarivani.com

www.hamarivani.com