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मंगलवार, 17 अगस्त 2010

कविता रच डाली

आसमान में बादल छाया 
छुप गया सूरज शीतल छाया 
मेरे इस उद्वेलित मन ने 
          कविता रच डाली 

Storm Watchठंडी हवा का झोंका आया 
कारी बदरी मन भरमाया 
मन-मयूर ने पंख फैलाकर 
          कविता रच डाली 
गीली मिटटी की खुश्बू से 
श्यामल-श्यामल सी धरती से 
मन के अन्दर गीत जागा और 
            कविता रच डाली 

ये धरती ये कारी बदरी 
मन को भरमाती ये नगरी 
उद्वेलित कर गयी इस मन को और मैंने 
                        कविता रच डाली

1 टिप्पणी:

  1. कविता रचने के कारण पसंद आये सुंदर रचना के लिए बधाई

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