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मंगलवार, 14 सितंबर 2010

आज हिंदी दिवस है . सभी हिंदी चिट्ठाकारों को मेरी ओर से हार्दिक बधाइयां

आज हिंदी दिवस है . सभी हिंदी चिट्ठाकारों को मेरी ओर से हार्दिक बधाइयां .इस अवसर पर प्रस्तुत है एक कविता
निजु भाषा उन्नति अह़े सब उन्नति के मूल
बिनु निजु भाषा ज्ञान के मिटे न हिय के शूल
                       --- "भारतेंदु हरिश्चंद "----

अब प्रस्तुत है मेरी लिखी एक कविता :

तेरी अधरों की मुस्कान
देखने को हम तरस गए
घटाए भी उमड़-घुमड़ कर
यहाँ वहाँ बरस गए

पर तेरी वो मुस्कान
जो होंठों पर कभी कायम था
पता नहीं क्यों किस जहां में
जाकर सिमट गए

तेरी दिल की पुकार
सुनना ही मेरी चाहत है
प्यार की कशिश को पहचानो
ये दिल तुझसे आहत है

मुस्कुराना गुनाह तो नहीं
ज़रिया है जाहिर करने का
होंठो से न सही इन आँखों से
बता दो जो दिल की छटपटाहट है

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....
    अच्छी पंक्तिया सृजित की है आपने ........
    भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
    हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

    एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
    (प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
    http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुस्कुराना गुनाह तो नहीं
    ज़रिया है जाहिर करने का
    होंठो से न सही इन आँखों से
    बता दो जो दिल की छटपटाहट है...bahut sundar.hindi divas ki subhakaamanaaye.

    उत्तर देंहटाएं
  3. तेरी अधरों की मुस्कान
    देखने को हम तरस गए
    घटाए भी उमड़-घुमड़ कर
    यहाँ वहाँ बरस गए
    .....बहुत बढ़िया प्रस्तुति ..
    हिंदी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाये....

    उत्तर देंहटाएं

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